आंदोलनरत छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ, राहुल-प्रियंका के साथ कथित व्यवहार पर भी जताया आक्रोश
अम्बिकापुर, 22 जुलाई 2026, द शूटर। जब देश का युवा अपने भविष्य को लेकर सड़कों पर उतरता है, तो उसकी आवाज को संवाद से सुना जाना चाहिए, न कि डंडों से दबाया जाना चाहिए। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और बार-बार हो रहे पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं सरगुजा संभाग प्रभारी राजेश दुबे (अधिवक्ता) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राजेश दुबे ने जारी बयान में कहा कि देशभर के छात्र-छात्राएं केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं से निराश होकर जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे थे। उनका आरोप है कि ऐसे प्रदर्शन पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग करना केंद्र सरकार की क्रूर और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई से आहत होकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में प्रधानमंत्री से चर्चा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरने पर पहुंचे थे। राजेश दुबे ने आरोप लगाया कि इस दौरान राहुल गांधी को कथित तौर पर घसीटते हुए गिरफ्तार किया गया और प्रियंका गांधी के साथ भी पुलिस का व्यवहार अनुचित रहा। उन्होंने इसे लोकतंत्र, संविधान और कानून व्यवस्था की गरिमा के विपरीत बताया।राजेश दुबे ने अपने बयान में केंद्र सरकार की कार्यशैली की तुलना ब्रिटिश शासन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार अंग्रेज भारतीयों की आवाज को दमन के जरिए दबाने का प्रयास करते थे, उसी प्रकार आज भी विरोध के स्वर को बलपूर्वक रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र संघर्षों की बुनियाद पर खड़ा हुआ है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठने वाली आवाजों को दबाया नहीं जा सकता।उन्होंने केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करने, संवाद का रास्ता अपनाने तथा लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करने की अपील की। साथ ही कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था और विश्वास बहाली से ही संभव है।

