रोजगार, विस्थापन और पुनर्वास के सवाल पर अड़े प्रभावित परिवार, दो घंटे रुका कोयला परिवहन; प्रशासन की पहल पर फिलहाल टला गतिरोध

सूरजपुर, 21 जुलाई 2026, द शूटर।जब अपनी ही जमीन पर भविष्य असुरक्षित दिखाई देने लगे, तो आवाज केवल विरोध नहीं रह जाती, बल्कि हक की पुकार बन जाती है। कुछ ऐसा ही दृश्य मंगलवार को एसईसीएल भटगांव क्षेत्र की महामाया ओपन कास्ट परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के सामने देखने को मिला, जहां नगर पंचायत जरही तथा ग्राम पंचायत दूरती और मरहट्टा सेंधोपारा के प्रभावित भूस्वामी रोजगार, विस्थापन और पुनर्वास की वर्षों पुरानी मांगों को लेकर एकजुट हो गए। शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ आंदोलन के चलते मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के दोनों प्रवेश द्वार करीब सात घंटे तक बंद रहे और पूरे कार्यालय का कामकाज ठप पड़ गया।
धरने के कारण कार्यालय में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की आवाजाही भी प्रभावित रही। कार्यालय समय समाप्त होने के बाद भी कई कर्मचारियों को बाहर निकलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आंदोलन का असर केवल कार्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि करीब दो घंटे तक एसईसीएल का कोयला परिवहन भी बाधित रहा। मुख्य मार्ग पर कोयला वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो गई।धरना स्थल पर बड़ी संख्या में पहुंचे भूस्वामियों ने एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि परियोजना के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित किए जाने के वर्षों बाद भी अनेक पात्र परिवार रोजगार, विस्थापन और पुनर्वास जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उनका कहना था कि प्रबंधन ने कई बार लिखित आश्वासन दिए, लेकिन हर बार उम्मीदों को केवल कागजों तक ही सीमित रखा गया। इसी उपेक्षा ने अब लोगों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।आंदोलन की पूर्व सूचना प्रशासन को होने के कारण सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। थाना प्रभारी बृजेश सिन्हा पुलिस बल के साथ पूरे समय मौके पर मौजूद रहे और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी। पुलिस की सतर्क मौजूदगी से पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ तथा कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही।मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार जरही ने भूस्वामियों और एसईसीएल प्रबंधन के बीच चर्चा कराई। उन्होंने कंपनी के अधिकारियों को प्रभावित परिवारों की लंबित मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर उचित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।भूस्वामियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि नायब तहसीलदार की मौजूदगी में एसईसीएल अधिकारियों ने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। हालांकि उन्होंने दो टूक कहा कि यदि तय समय के भीतर रोजगार, विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मामलों का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा और निर्णायक लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।इस आंदोलन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास परियोजनाओं की कीमत चुकाने वाले परिवारों को उनके अधिकार आखिर कब मिलेंगे। जिन लोगों ने अपनी जमीन विकास के नाम पर सौंप दी, वे आज भी रोजगार और सम्मानजनक पुनर्वास की उम्मीद में प्रशासन और प्रबंधन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। यही इंतजार अब उनके धैर्य की सबसे कठिन परीक्षा बनता जा रहा है।
