अवैध कब्जे से बाधित हुई जल निकासी, नगर पंचायत ने एसईसीएल प्रबंधन को थमाया नोटिस, अतिक्रमण हटाने की उठी मांग

सूरजपुर 23 जूलाई 2026 द शूटर। विक्की तिवारी । प्रकृति ने जिस नाले को बरसाती पानी की निकासी का रास्ता बनाया था, लालच ने उसी रास्ते को मिट्टी से भर दिया। आज उसकी कीमत एसईसीएल की डीएमक्यू श्रमिक कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों परिवार चुका रहे हैं। लगातार हो रही बारिश में जब पानी का प्राकृतिक मार्ग बंद मिला तो उसने रास्ता बदल लिया और अब वह सीधे श्रमिकों के घरों में घुस रहा है। भीगी दीवारें, पानी में डूबा घरेलू सामान और हर बरसात के साथ लौट आने वाली चिंता, यही अब कॉलोनी के लोगों की नियति बन गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों पुराने प्राकृतिक नाले पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर उसे पाट दिया। इसके बाद अवैध प्लाटिंग कर जमीन की बिक्री कर दी गई, जिससे बरसाती पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई। परिणामस्वरूप हल्की से तेज बारिश होते ही पूरी कॉलोनी जलभराव की चपेट में आ जाती है और लोगों का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पंचायत शिवनंदनपुर ने भी हस्तक्षेप किया है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने 21 जुलाई 2026 को एसईसीएल विश्रामपुर के महाप्रबंधक को पत्र जारी कर डीएमक्यू कॉलोनी के बीच से गुजरने वाले नाले की तत्काल सफाई कराने और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि वार्ड क्रमांक 12 गुरुघासीदास वार्ड स्थित डीएमक्यू कॉलोनी में पेट्रोल पंप के समीप से गुजरने वाला नाला जाम होने के कारण बरसात का पानी सीधे मकानों में प्रवेश कर रहा है। नगर पंचायत को लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं और वर्तमान में स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है।

नगर पंचायत ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र कार्रवाई कर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 3 (खंड 18) के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी। इस पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर सूरजपुर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा नगर पंचायत अध्यक्ष को भी भेजी गई है।
इधर कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही हालात बनते हैं। घरों में पानी भरने से फर्नीचर, अनाज, कपड़े और अन्य जरूरी सामान खराब हो रहे हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार पूरी रात पानी निकालने में बिताते हैं, लेकिन अगली बारिश के साथ उनकी परेशानी फिर वहीं से शुरू हो जाती है।
रहवासियों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान केवल नाले की सफाई से नहीं होगा। वर्षों पुराने प्राकृतिक नाले से अतिक्रमण हटाकर उसकी मूल चौड़ाई और बहाव को बहाल करना होगा। साथ ही अवैध कब्जा और प्लाटिंग करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई भी आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति प्राकृतिक जलमार्गों से छेड़छाड़ करने का साहस न कर सके।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन, राजस्व विभाग और एसईसीएल प्रबंधन ने संयुक्त रूप से ठोस कदम नहीं उठाए तो लगातार हो रही बारिश के बीच जलभराव की यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। तब नुकसान केवल मकानों का नहीं होगा, बल्कि श्रमिक परिवारों की सुरक्षा, उनकी आजीविका और उनके सपनों का भी होगा। यही कारण है कि अब कॉलोनी के लोग केवल नाले की सफाई नहीं, बल्कि प्राकृतिक जलमार्ग को उसके मूल स्वरूप में वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं।
