केशवपुर में युवक ने तालाब की फोटो में जोड़ दिया मगरमच्छ, व्हाट्सएप पर तस्वीर फैलते ही मचा हड़कंप; वन विभाग की शिकायत पर गिरफ्तारी
रामानुजनगर (द शूटर)। केशवपुर के यादवपारा में गुरुवार को एक तस्वीर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी। गांव के तालाब में मगरमच्छ दिखाई देने की तस्वीर व्हाट्सएप समूहों में घूमने लगी तो लोगों को लगा कि सचमुच तालाब में मगरमच्छ आ गया है। आसपास रहने वाले परिवार सहम गए और बच्चों व मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। बात वन विभाग तक पहुंची तो अमला भी तत्काल हरकत में आया। अधिकारी-कर्मचारी तालाब पहुंचे, छानबीन शुरू हुई और जरूरत पड़ने पर मगरमच्छ को पकड़ने के लिए रेस्क्यू दल को भी तैयार कर लिया गया। घंटों की इस कवायद के बाद जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया। तालाब में कोई मगरमच्छ था ही नहीं। वायरल तस्वीर में मगरमच्छ को एआई तकनीक की मदद से जोड़ा गया था।मामला ग्राम पंचायत केशवपुर के यादवपारा का है। 23 जुलाई को ग्रामीणों और पंचायत की ओर से वन विभाग को तालाब में मगरमच्छ दिखाई देने की जानकारी दी गई थी। सूचना के साथ सोशल मीडिया पर चल रही तस्वीर भी सामने आई। मामला वन्यजीव से जुड़ा होने के कारण विभाग के लिए इसे नजरअंदाज करना संभव नहीं था। मगरमच्छ संरक्षित वन्यजीव है, इसलिए अधिकारियों ने सूचना को गंभीरता से लिया और कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचकर तालाब तथा आसपास के हिस्से की तलाश शुरू कर दी।काफी खोजबीन के बाद भी तालाब में मगरमच्छ होने के कोई ठोस संकेत नहीं मिले। इसके बाद विभाग ने वायरल तस्वीर की पड़ताल शुरू की। पूछताछ की कड़ी आगे बढ़ी तो मामला गांव के ही ब्रजलाल यादव पिता रूपनारायण यादव तक पहुंचा।वन विभाग के अनुसार पूछताछ में ब्रजलाल ने स्वीकार किया कि उसने अपने मोबाइल से एआई तकनीक का इस्तेमाल कर तालाब की असली तस्वीर में मगरमच्छ की तस्वीर जोड़ दी थी। इसके बाद तैयार फोटो को अलग-अलग व्हाट्सएप समूहों में साझा कर दिया। तस्वीर इतनी वास्तविक नजर आ रही थी कि उसे देखने वाले ग्रामीणों ने भी इसे सच मान लिया।
मजाक या प्रयोग समझकर बनाई तस्वीर, पूरा अमला हो गया परेशान
मोबाइल पर कुछ मिनट में तैयार की गई एक तस्वीर का असर गांव में वास्तविक खतरे जैसा हुआ। जिन परिवारों का तालाब के आसपास आना-जाना था, उनमें डर फैल गया। बच्चों को लेकर परिजन चिंतित हुए तो मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भी आशंका बनी रही। दूसरी ओर वन विभाग को अपने अधिकारी-कर्मचारियों और संसाधनों को तालाब में मगरमच्छ की तलाश के लिए लगाना पड़ा।
वन विभाग का कहना है कि गलत सूचना के कारण न केवल ग्रामीणों के बीच अनावश्यक भय और भ्रम पैदा हुआ, बल्कि रेस्क्यू दल सहित सरकारी संसाधनों का भी बेवजह इस्तेमाल करना पड़ा। विभाग का नियमित कामकाज भी प्रभावित हुआ।
वन विभाग ने थाने में दिया प्रतिवेदन, युवक गिरफ्तार
मामले की सच्चाई सामने आने के बाद वन विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। संबंधित युवक के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू करते हुए रामानुजनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रतिवेदन सौंपा गया। इसके बाद पुलिस ने नियमानुसार युवक को गिरफ्तार कर लिया। मामले में आगे की जांच और वैधानिक कार्रवाई जारी है।
इस घटना के बाद वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि एआई या किसी अन्य डिजिटल तकनीक से बनाई गई भ्रामक तस्वीर और वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा न करें। किसी तस्वीर को देखकर बिना उसकी सच्चाई जाने आगे भेजना भी कई बार पूरे इलाके में अफवाह और डर की वजह बन सकता है।
विभाग ने कहा है कि यदि कहीं वास्तव में मगरमच्छ, हाथी, भालू या कोई अन्य वन्यजीव दिखाई देता है तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें। वन्यजीव के आसपास जाने या बिना पुष्टि सोशल मीडिया पर जानकारी फैलाने के बजाय विभागीय अमले को मौके पर पहुंचने का अवसर दिया जाना चाहिए। कुलमिलाकर केशवपुर की घटना में मगरमच्छ सिर्फ तस्वीर में था, लेकिन उस तस्वीर से गांव में पैदा हुआ डर बिल्कुल असली था। एआई ने तस्वीर बदल दी, मगर उसके बाद ग्रामीणों की चिंता और वन अमले की भागदौड़ मोबाइल की स्क्रीन तक सीमित नहीं रही।
